

द्वारका एवं कुशस्थली: विष्णु पुराण में उल्लेख है कि द्वारका का निर्माण प्राचीन कुशस्थली नगर के स्थान पर हुआ था। समुद्री पुरातत्वविद् डॉ. एस.आर. राव ने समुद्र तट के निकट जलमग्न संरचनाएँ खोजीं, जिन्हें समुद्र के नीचे एक और प्राचीन नगर के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
नेपाल का राजवंश: नेपाली शासकों की वंशावली का अभिलेख कलियुग के आरंभ से निरंतर संरक्षित बताया गया है।
कश्मीर का राजवंश: ऐतिहासिक ग्रंथों में दर्ज कश्मीरी राजाओं की वंशावली भगवान श्रीकृष्ण के काल तक जाती है।
कालिदास के श्लोक: महाकवि कालिदास के विशिष्ट श्लोक राजा विक्रमादित्य के काल निर्धारण के लिए खगोलीय और कालक्रम संबंधी संकेत प्रदान करते हैं।
आर्यभट्ट का खगोलीय संदर्भ: गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री आर्यभट्ट के श्लोक विशिष्ट ऐतिहासिक कालखंडों का उल्लेख करते हैं।
वराहमिहिर के खगोलीय श्लोक: बृहत्संहिता के श्लोक सत्यापन योग्य कालक्रम संबंधी विवरण प्रदान करते हैं।
श्रीमद् रामायण: भौगोलिक, खगोलीय और वंशावली संबंधी विवरणों से युक्त मूल महाकाव्य।
महाभारत: कुरुक्षेत्र युद्ध के समय की राजवंशीय परंपराओं, राज्यों और खगोलीय स्थितियों का विस्तृत वर्णन करने वाला महान महाकाव्य।
श्रीराम सेतु: विश्वगुणादर्श चम्पू जैसे ग्रंथों में सेतु का विस्तृत वर्णन मिलता है।
साहित्यिक परंपराएँ: श्रीराम की महिमा का वर्णन करने वाली विभिन्न भारतीय भाषाओं में रचित विस्तृत काव्य परंपरा।
कुश के बाद की वंशावली: श्रीराम के पुत्र कुश से उत्पन्न राजाओं की वंशावली विष्णु पुराण में वर्णित है।
बृहद्रथ से शालिवाहन तक की वंशावली: विष्णु पुराण में संरक्षित निरंतर राजवंशीय वंशावलियाँ।
प्रणवलिपि: पशुपतिदेव की प्रतिमाशैली के साथ प्राप्त प्राचीन अभिलेख।
स्वस्तिक: प्राचीन पुरातात्त्विक स्थलों पर इस पवित्र चिह्न की व्यापक उपस्थिति।
द्वारका में विष्णु प्रतिमा: जलमग्न द्वारका में पुराणों के वर्णनों से मेल खाने वाली प्रतिमाओं की पुरातात्त्विक खोजें।
सप्तऋषि कालगणना प्रणाली: सप्तऋषियों (उर्सा मेजर) की नक्षत्रों के संदर्भ में दृश्य गति पर आधारित कालगणना।
थाई राजपरंपराएँ: थाईलैंड के राजाओं द्वारा “राम” की उपाधि धारण करना (राम I से X) तथा थाई राष्ट्रीय महाकाव्य रामाकियन।
मिस्र के राजा (रामेसेस): मिस्र के फिरऔनों के राजनामों (रामेसेस) में भाषाई और सांस्कृतिक समानताएँ।
श्रीलंका के अवशेष: श्रीलंका में रामायण से जुड़े दृश्य, भौगोलिक और लोकपरंपरागत स्थल (अशोक वाटिका, रावण एला)।
अयोध्या राम जन्मभूमि के माप: स्कन्द पुराण में दिए गए विशिष्ट मापों का स्थल की ज्यामिति से मेल।
घोसुंडी अभिलेख: प्राचीन वैष्णव उपासना और ऐतिहासिक शासकों का उल्लेख करने वाला प्राचीन शिलालेख।
हड़प्पा स्थलों पर शिवलिंग: सिंधु घाटी की बस्तियों से शिवलिंगों की पुरातात्त्विक प्राप्ति।
प्रणव प्रतीकवाद: ॐ के ऐसे प्रतीक जिन्हें 8,000 वर्ष से भी अधिक प्राचीन बताया गया है।
अदिति युग: वैदिक खगोलीय संदर्भों के आधार पर लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा विश्लेषित कालखंड।
सांची में लक्ष्मी की आकृतियाँ: सांची स्तूप के तोरणों पर उत्कीर्ण देवी लक्ष्मी के प्राचीन चित्रण।
हाथीबाड़ा अभिलेख: प्राचीन देवालयों और राजवंशीय परंपरा का उल्लेख करने वाला अभिलेखीय प्रमाण।
द्वारकाधीश मंदिर के संदर्भ: पुराण साहित्य में मंदिर की मूल संरचना का उल्लेख।
पेदकल्लेपल्ली नागेश्वर मंदिर अभिलेख: राजकीय दानों और प्राचीन वंशावलियों का उल्लेख करने वाले शिलालेख।
अयोध्या
मिथिला
मथुरा
जनकपुरी
हस्तिनापुर
कुरुक्षेत्र
सागर (राजा सगर के नाम से व्युत्पन्न)
जाह्नवी (ऋषि जह्नु से संबंधित — गंगा)
भागीरथी (राजा भगीरथ के नाम से व्युत्पन्न)
त्रिलिंग / तेलुगु (तीन शिवलिंगों की भूमि)
भारतवर्ष (सम्राट भरत के नाम पर नामित उपमहाद्वीप)
भारतखंड (भारत का भौगोलिक क्षेत्र)
आंध्र
अंग
वंग
कलिंग
कश्मीर (ऋषि कश्यप द्वारा स्थापित माना गया)
भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में (उदाहरण: तेलुगु में 40, तमिल में 10, कन्नड़ में 13, मलयालम में 4, हिंदी में 1)
संस्कृत में (भास तथा अन्य शास्त्रीय नाटककारों की प्रमुख कृतियों सहित)
प्राकृत में (कम से कम 10 प्रमुख काव्य रचनाएँ)
बौद्ध जातक कथाओं में (उदाहरण: दशरथ जातक)
लोक एवं ग्रामीण परंपराओं में (ग्रामीण भारत में मौखिक कथा-परंपरा)
रघुवंशम्
अभिज्ञान शाकुन्तलम्
विक्रमोर्वशीयम्
मालविकाग्निमित्रम्
व्युप्तकेशाय (सूक्ष्म/छोटे केशों वाले)
ताराय (तारने वाले / उद्धारकर्ता)
कवचिने (कवच धारण करने वाले)
वर्मिणे (रक्षा कवच से सुरक्षित)
पशुपतये (समस्त जीवों के स्वामी)
आयुधिने (आयुध धारण करने वाले)
नीलग्रीवाय (नीले कंठ वाले)
उग्राय (उग्र स्वरूप वाले)
भीमाय (भयंकर / प्रभावशाली स्वरूप वाले)
स्थावराणां पतये (स्थावरों / वृक्षों के स्वामी)
गंगाधर
पन्नगभूषण
चन्द्रशेखर
मृगधर
त्रिलोचन
त्र्यम्बक
महामेघनिवासी
व्योमकेश
ज्योतिषामयनम्
अग्निज्वाला
परशुमभयदम्
गजेश्वर
नन्दी
गुहावासी
दिगम्बर
मृगपाणि
व्यक्ताव्यक्त
शिवलिंगम्
नन्दीश्वरावतारम्
गजावतारम्
वृषभावतारम्
किरातावतारम्
द्विजेश्वरावतारम्
तीर्थहल्ली शासनम्
बेगुरु ताम्रपत्र अभिलेख
सोरल ताम्रशासनम् (ताम्रपत्र अभिलेख)
तडिनल्लु बनवासी शासनम्
अनंतपुरम् दान अभिलेख
मधुकेश्वर मंदिर अभिलेख
बलगामी ग्राम अभिलेख
नरर्षभ (मानव-वृषभ आकृति)
पवित्र पीपल वृक्ष के प्रतीक
वैदिक मंत्रों से संबंधित माने जाने वाले चित्रण
नृत्य करती युवती की कांस्य प्रतिमा
देवियों की मूर्तियाँ
पद्मासन में ध्यानरत आकृति
ऊपरी वस्त्र (उत्तरीय) धारण करने वाली आकृतियाँ
पवित्र कलाई सूत्र (रक्षाबंधन / कंकण)
भट्ठी में पकाई गई ईंटें (उन्नत वास्तुकला का संकेत)
मानकीकृत सार्वजनिक एवं निजी कुएँ
सीढ़ियों सहित सार्वजनिक स्नानागार एवं जलाशय
ज्वारीय गोदी / जहाज निर्माण स्थल (उदाहरण: लोथल)
पासे का खेल (अक्ष)
व्यापार चिह्न एवं व्यापारी मुहरें
सिंधुपदम् (समुद्री मार्ग / मानचित्र)
यज्ञ कुण्ड (घी के अवशेष वाले अग्निकुण्ड)
एक सींग वाले पशु के प्रतीक (एकशृंग)
त्रिशूल के प्रतीक
रंगोली (रंगीन भूमि सजावट के नमूने)
हस्तघ्नम् (धनुर्धर की कलाई रक्षा-पट्टियाँ)
धम्मपद (ब्राह्मणवग्ग): श्लोक 9, 10, 38 और 41।
जातक कथाएँ: सुखविहार जातक, श्रावस्तीपुरम् और अश्वलायन सुत्तम् जैसी कथाएँ।
| श्रेणी | प्रमाणों की संख्या |
|---|---|
| पौराणिक एवं ऐतिहासिक प्रमाण | 28 |
| भगवान शिव के नाम | 18 |
| सांस्कृतिक पुरावस्तुएँ (संस्कृति) | 16 |
| वैदिक विशेषण (नमकम्) | 10 |
| पवित्र स्थल | 6 |
| नाम-विज्ञान | 6 |
| देश / क्षेत्रीय नाम | 5 |
| जनमेजय अभिलेख | 5 |
| शिव अवतार | 5 |
| कालिदास की कृतियाँ | 4 |
| हड़प्पा प्रतिमाशास्त्रीय प्रमाण | 4 |
| धम्मपद श्लोक | 4 |
| जातक कथाएँ | 3 |
| युधिष्ठिर अभिलेख | 2 |
| प्रणव / वैदिक भाष्य विवरण | 3 |
| पहचाने गए प्रमाणों की कुल संख्या | 119 |