परिशिष्ट – 1: श्रीराम का वंश (इक्ष्वाकु वंश)

स्रोत: विष्णु पुराण तथा सूर्यवंश (सूर्यवंश) का वर्णन करने वाले शास्त्रीय ऐतिहासिक ग्रंथों से संकलित।

I. इक्ष्वाकु वंश की कालानुक्रमिक वंशावली

A. श्रीराम से पूर्व का काल (पूर्वज)

  1. इक्ष्वाकु: अयोध्या नगरी तथा सूर्यवंश के संस्थापक।

  2. विकुक्षि (शशाद): इक्ष्वाकु के ज्येष्ठ पुत्र। (टिप्पणी: उनके भाइयों निमि, दण्डक और शकुनि ने उत्तरी क्षेत्रों पर शासन किया, जबकि 48 अन्य पुत्रों ने दक्षिणी क्षेत्रों पर शासन किया।)

  3. अनेनस् (ककुत्स्थ)

  4. पृथु

  5. विष्टारश्व

  6. युवनाश्व प्रथम

  7. श्रावस्त: प्राचीन नगरी श्रावस्ती के संस्थापक।

  8. बृहदश्व

  9. कुवलयाश्व (धुन्धुमार): राक्षस धुन्धु का वध करने के बाद धुन्धुमार की उपाधि प्राप्त की।

  10. दृढ़ाश्व, चन्द्राश्व एवं कपिलाश्व: कुवलयाश्व के पुत्र।

  11. हर्यश्व प्रथम

  12. निकुम्भ

  13. अमिताश्व

  14. कृताश्व

  15. प्रसेनजित

  16. युवनाश्व द्वितीय

  17. मान्धाता: सम्राट, जिन्होंने सूर्योदय से सूर्यास्त तक ज्ञात पृथ्वी के सातों द्वीपों सहित समस्त पृथ्वी पर शासन किया।

  18. पुरुकुत्स, अम्बरीष एवं मुचकुन्द: मान्धाता के प्रसिद्ध पुत्र।

  19. त्रसद्दस्यु: पुरुकुत्स के पुत्र।

  20. अनरण्य प्रथम

  21. हर्यश्व द्वितीय

  22. वसुमनस्

  23. त्रिधन्वा

  24. त्रय्यारुणि

  25. सत्यव्रत (त्रिशंकु)

  26. हरिश्चन्द्र: सत्य के प्रति अपनी पूर्ण निष्ठा के लिए प्रसिद्ध। उनके जीवन ने महात्मा गांधी को जीवनभर सत्य के अनुसरण के लिए प्रेरित किया।

  27. रोहिताश्व

  28. हरित प्रथम

  29. चञ्चु

  30. विजय एवं वासुदेव

  31. रुरुकु

  32. वृक

  33. बहु (असित)

  34. सगर: महान चक्रवर्ती सम्राट, जिन्होंने शक, यवन, कम्बोज, पारद और पहलवों को परास्त किया।

  35. असमंज: सगर के ज्येष्ठ पुत्र। उनके भाइयों ने समुद्र के विस्तार का कार्य किया, जिसके कारण समुद्र का नाम उनके पिता के नाम पर सागर पड़ा।

  36. अंशुमान

  37. दिलीप प्रथम

  38. भगीरथ: घोर तपस्या के द्वारा पवित्र गंगा को पृथ्वी पर लाए; इसी कारण गंगा को भागीरथी भी कहा जाता है।

  39. सुहोत्र

  40. नाभाग

  41. अम्बरीष: प्रसिद्ध वैष्णव भक्त, जिनकी अटूट भक्ति ने भगवान विष्णु को उनकी रक्षा के लिए हस्तक्षेप करने के लिए प्रेरित किया।

  42. सिन्धुद्वीप

  43. आयुतायु

  44. ऋतुपर्ण: पासे और गणना के गुप्त विज्ञान (अक्षहृदय) के विशेषज्ञ।

  45. सर्वकाम

  46. सुदास

  47. मित्रसह (कल्माषपाद)

  48. अश्मक

  49. मूलक

  50. दशरथ प्रथम

  51. इलाबिल

  52. विश्वसह प्रथम

  53. खट्वांग (दिलीप द्वितीय): ऐसे प्रसिद्ध राजा जो दिव्य आकाशीय यात्रा करने में सक्षम माने जाते हैं।

  54. दीर्घबाहु

  55. रघु: प्रसिद्ध विजेता, जिनके गौरवशाली वंश को महाकवि कालिदास ने अपने महाकाव्य रघुवंशम् में अमर कर दिया।

  56. अज

  57. दशरथ द्वितीय: अयोध्या के राजा तथा भगवान श्रीराम के पिता।

B. श्रीराम का काल

  1. श्रीराम, लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुघ्न

  2. कुश एवं लव: श्रीराम और सीता के पुत्र।

C. श्रीराम के पश्चात् की वंशावली (वंशज)

  1. अतिथि: कुश के पुत्र।

  2. निषध

  3. नल

  4. नाभ

  5. पुण्डरीक

  6. क्षेमधन्वा

  7. देवानीक

  8. अहीनागु

  9. रुरु

  10. परियात्र

  11. बल

  12. शल

  13. उक्थ

  14. वज्रनाभ

  15. शंखण

  16. व्युषिताश्व

  17. हिरण्यनाभ

  18. पुष्य

  19. ध्रुवसन्धि

  20. सुदर्शन

  21. अग्निवर्ण

  22. शीघ्रग

  23. मरु: ऐसे ऋषि-राजा जिनके बारे में कहा जाता है कि वे कलाप ग्राम (कलापग्राम) में निवास करते हैं और योगबल से दीर्घायु प्राप्त हैं।

  24. प्रसुष्रुक

  25. सुगन्धि

  26. अमर्ष

  27. सहस्वन्त

  28. भव (विश्रुतवान)

  29. बृहद्बल: महाभारत काल में कोसल के राजा, जिन्होंने कौरवों की ओर से युद्ध किया।

II. इक्ष्वाकु वंश की सहायक शाखाएँ

विष्णु पुराण में इक्ष्वाकु और उनके भाइयों से उत्पन्न कई प्रमुख उप-वंशों का वर्णन मिलता है:

  1. दिष्ट वंश एवं वशिष्ठ/वैशाली वंश:

    • राजा विशाल का जन्म दिष्ट वंश में हुआ और उन्होंने ऐतिहासिक नगरी वैशाली की स्थापना की।

  2. शर्याति वंश एवं अनर्त क्षेत्र:

    • अनर्त (शर्याति के पुत्र) ने अनर्त राज्य की स्थापना की, जो आधुनिक गुजरात क्षेत्र से संबंधित माना जाता है।

    • रेवत ने प्राचीन तटीय दुर्गनगरी कुशस्थली का निर्माण किया।

  3. समुद्र में डूबी द्वारका नगरी:

    • ऐतिहासिक ग्रंथों में वर्णित है कि कुशस्थली कालांतर में समुद्र में डूब गई।

    • श्रीकृष्ण ने बाद में कुशस्थली की आधारभूत परतों के ऊपर स्वर्ण नगरी द्वारका का निर्माण किया।

    • यह विवरण डॉ. एस. आर. राव द्वारा किए गए समुद्री पुरातात्त्विक अनुसंधानों से भी जोड़ा जाता है, जिनमें जलमग्न द्वारका के नीचे एक पुराने नगर की परत के अवशेष मिले थे।

  4. अन्य शाखाएँ:

    • नाभाग कुल, निमि वंश (मिथिला/जनकपुर के शासक) तथा दण्डक वंश।

III. वैदिकोत्तर राजवंशीय परंपराओं का सारांश

विष्णु पुराण में संरक्षित ये सभी राजवंशीय अभिलेख विभिन्न युगों में चली आ रही निरंतर वंशावलियों का विवरण प्रस्तुत करते हैं—इनमें श्रीराम, श्रीकृष्ण, पांडवों, बृहद्रथ के युगों के साथ-साथ वे राजवंश, गणराज्य (गण) और वंश भी शामिल हैं, जो आगे चलकर कलियुग तक जारी रहे।