परिशिष्ट – 2: सोम वंश (चन्द्रवंश)

उत्पत्ति: इला, इक्ष्वाकु की पुत्री/वंशजा थीं। बुध से उत्पन्न उनके पुत्र पुरूरवा चन्द्रवंश (सोमवंश) के संस्थापक माने जाते हैं।

I. सोमवंश – भाग 1: यादव वंश (भगवान श्रीकृष्ण की वंशावली)

  1. पुरूरवा (इला के पुत्र)

  2. आयु

  3. नहुष

  4. यति एवं ययाति

  5. यदु, पुरु आदि (ययाति ने अपना राज्य अपने पुत्रों में विभाजित किया)

  6. सहस्रजित, शतजित एवं हैहय

  7. धर्म

  8. धर्मनेत्र

  9. कुन्ति

  10. सहजित

  11. महिष्मान: ऐतिहासिक महिष्मती नगर के निर्माण से संबंधित माने जाते हैं।

  12. भद्रसेन

  13. दुर्दम

  14. धनक

  15. कृतवीर्य

  16. कार्तवीर्य अर्जुन (सहस्रार्जुन): सात द्वीपों पर प्रभुत्व रखने वाले सार्वभौम शासक।

  17. शूर एवं शूरसेन: शूरसेन प्रदेश के शासक।

  18. जयध्वज

  19. तालजंघ

  20. वीतिहोत्र

  21. भरत

  22. वृष

  23. क्रोष्टु

  24. ध्वजिनिवान

  25. स्वाति

  26. उरुशंकु

  27. चित्ररथ

  28. शशबिन्दु: प्रसिद्ध चक्रवर्ती सम्राट।

  29. पृथुश्रवस

  30. उशन

  31. शितप

  32. रुक्मकवच

  33. परावृत

  34. परावृत

  35. रुक्मेषु

  36. विदर्भ: विदर्भ राज्य के संस्थापक एवं शासक।

  37. क्रथकैशिक

  38. देवरात

  39. देवक्षत्र

  40. मधु

  41. कुमारवर्मा

  42. अनु

  43. पुरुमित्र

  44. अंशु

  45. सात्वत

  46. भजमान

  47. विदुरथ

  48. शूर I

  49. शमि

  50. प्रतिक्षत्र

  51. स्वयम्भोज

  52. हृदिक

  53. कृतवर्मा

  54. शूर II

  55. वसुदेव

  56. बलराम एवं श्रीकृष्ण

  57. प्रद्युम्न

  58. अनिरुद्ध

  59. वज्र

  60. प्रतिबाहु

  61. सुबाहु

  62. श्रुतसेन

II. सोमवंश – भाग 2: पौरव वंश (पाण्डवों की वंशावली)

  1. पुरूरवा (इला के पुत्र)

  2. आयु

  3. नहुष

  4. यति एवं ययाति

  5. पुरु (पूरु) एवं यदु

  6. जह्नु

  7. सुरथ

  8. विदुरथ

  9. सार्वभौम

  10. जयत्सेन

  11. आराधित

  12. अयुतायु

  13. अक्रोधन

  14. देवातिथि

  15. ऋक्ष

  16. भीमसेन

  17. दिलीप

  18. प्रतीप

  19. देवापि, शान्तनु एवं बाह्लिक

  20. विचित्रवीर्य (राजा शान्तनु के पुत्र)

  21. धृतराष्ट्र एवं पाण्डु

  22. युधिष्ठिर, भीम एवं अर्जुन (पाण्डव)

  23. अभिमन्यु

  24. परीक्षित

  25. जनमेजय

ऐतिहासिक टिप्पणी: पाण्डव वंश (पौरव वंश) और भगवान श्रीकृष्ण का वंश (यादव वंश) दोनों ही इला के माध्यम से अंततः इक्ष्वाकु वंश से जुड़े बताए जाते हैं। इसी कारण पौराणिक वंशावली अभिलेखों में दोनों शाखाओं में कई राजवंशीय पूर्वजों के नाम पुनः दिखाई देते हैं।