परिशिष्ट – 3: मगध के राजवंश, क्षेत्रीय गण एवं ग्रंथीय संदर्भ

स्रोत: विष्णु पुराण (चतुर्थ अंश), श्रीमद्भागवतम् (द्वादश स्कन्ध), राजतरंगिणी तथा प्राचीन भारतीय राजवंशों के ऐतिहासिक कालक्रमों के आधार पर संकलित।

I. मगध के कालानुक्रमिक राजवंश

1. बृहद्रथ वंश (23 राजा — लगभग 1000 वर्ष)

  1. बृहद्रथ (संस्थापक)

  2. जरासंध

  3. सहदेव (महाभारत युद्ध में भाग लिया)

  4. सोमापि

  5. श्रुतश्रवा

  6. अयुतायु

  7. निरमित्र

  8. सुनेत्र

  9. बृहत्कर्मा

  10. सेनजित (श्येनजित)

  11. श्रुतंजय

  12. विप्र

  13. शुचि

  14. क्षेम्य

  15. सुव्रत

  16. धर्म

  17. सुश्रुत

  18. दृढसेन

  19. सुबाल

  20. सुनीत

  21. सत्यजित

  22. विश्वजित

  23. रिपुंजय (मंत्री मुनिक द्वारा पदच्युत)

2. प्रद्योत वंश (5 राजा — 138 वर्ष)

  1. प्रद्योत (मुनिक के पुत्र)

  2. पालक (बालक)

  3. विशाखयूप

  4. जनक

  5. नन्दिवर्धन

3. शैशुनाग वंश (10 राजा — 362 वर्ष)

  1. शिशुनाग (नन्दी)

  2. काकवर्ण

  3. क्षेमधन्वा

  4. क्षत्रौज

  5. बिम्बिसार (विधिसार)

  6. अजातशत्रु

  7. दर्भक (अर्भक)

  8. उदयन

  9. नन्दिवर्धन

  10. महानन्दी

4. नन्द वंश (9 राजा — लगभग 100 वर्ष)

  1. महापद्म नन्द 40–47. महापद्म नन्द के आठ पुत्र (सुमाल्य एवं अन्य सहित)

5. मौर्य वंश (10 राजा — 137 वर्ष)

  1. चन्द्रगुप्त मौर्य

  2. बिन्दुसार (टिप्पणी: आधुनिक इतिहास ग्रंथ कभी-कभी शैशुनाग वंश के बिम्बिसार और मौर्य वंश के बिन्दुसार के बीच भ्रम उत्पन्न करते हैं)

  3. अशोकवर्धन (सम्राट अशोक)

  4. सुयश (कुणाल)

  5. दशरथ

  6. संयुत (संगत)

  7. शालिशुक

  8. देववर्मन (सोमशर्मा)

  9. शतधन्वन् (श्रुतधन्वा)

  10. बृहद्रथ (सेनापति पुष्यमित्र शुंग द्वारा हत्या)

6. शुंग वंश (10 राजा — 112 वर्ष)

  1. पुष्यमित्र शुंग

  2. अग्निमित्र

  3. वसुमित्र

  4. सुज्येष्ठ (उदंक)

  5. भद्रक (पुलिंदक)

  6. घोषवसु

  7. वज्रमित्र

  8. भागवत

  9. देवभूति (वासुदेव कण्व द्वारा पदच्युत)

7. कण्व वंश (4 राजा — 45 वर्ष)

  1. वासुदेव कण्व

  2. भूमित्र

  3. नारायण

  4. सुशर्मन्

8. आंध्र सातवाहन वंश (30 राजा — 456 वर्ष)

  1. बलिपुच्छक / सिमुक (आंध्रराज)

  2. कृष्ण

  3. शान्तकर्णि I (अन्तकर्णि)

  4. पूर्णोत्संग

  5. सातकर्णि II

  6. लम्बोदर

  7. अपीलक (पीलक)

  8. मेघवती

  9. पटुमान

  10. अरिष्टकर्ण

  11. हाल (हालाहल)

  12. पट्टलक (पललक)

  13. पुलिंदसेन

  14. सुन्दर सातकर्णि

  15. शिवस्वाति

  16. गौतमीपुत्र सातकर्णि (गोमली)

  17. अहिमान

  18. शान्तकर्णि

  19. शिवश्री सातकर्णि

  20. शिवस्कन्ध

  21. यज्ञश्री सातकर्णि

  22. विजयनश्री (विजयज्ञ)

  23. चन्द्रश्री सातकर्णि (कोटा वेंकटाचलम् की कालक्रम व्यवस्था के अनुसार, गुप्त वंश के चन्द्रगुप्त I और समुद्रगुप्त ने उनकी अल्पायु के समय संरक्षक के रूप में कार्य किया; इस मत में यह चन्द्रगुप्त सिकन्दर के आक्रमण का समकालीन माना गया है)

  24. पुलोमावि (सुलोमापि)

II. क्षेत्रीय राजवंश, कुल (गण) एवं सातवाहन-पश्चात् शासक

  1. आंध्रभृत्य (7 राजा)

  2. आभीर (10 राजा)

  3. गर्दभिन (10 राजा)

  4. यवन (8 राजा)

  5. तुरुष्क / शक (14 राजा)

  6. मुण्ड (13 राजा) — [कुल 1–6 का संयुक्त शासन लगभग 1090 वर्षों तक चला]

  7. मौन एवं कैङ्किल

  8. विन्ध्यशक्ति एवं वाकाटक:

    • शासक: विन्ध्यशक्ति, पुरंजय, रामचन्द्र, धर्मवर्मा, वंग, नन्दन, सुनन्दि, नन्दियश, प्रवीर तथा उनके वंशज।

  9. बाह्लिक, पुष्यमित्र एवं पटुमित्र (13 राजा)

  10. एकल एवं आंध्र (7 राजा)

  11. नैषध एवं विश्वस्फटिक: आंध्र राज्यपालों के अधीन कोसल क्षेत्र में स्थापित।

  12. कैवर्त, पटु, पुलिंद एवं मगध राजवंश: गया, प्रयाग और गंगा तट (गंगातीर) क्षेत्रों के शासक।

  13. नव नाग: पद्मावती से शासन करने वाले 9 नाग राजा।

  14. देवरक्षित: कोसल, आंध्र, पुण्ड्र, ताम्रलिप्त और समतट पर शासन किया।

  15. गुह वंश: कलिंग, महिष, महेन्द्र और भौम पर शासन किया।

  16. मणिधान्यक उत्तराधिकारी: नैषध, नैमिषक और कालकासक क्षेत्रों पर शासन किया।

  17. कनक: त्रैराज्य और मूषिक राज्यों पर शासन किया।

  18. सीमांत क्षेत्र के शासक (व्रात्य, म्लेच्छ, शूद्र एवं गण): सिंधु, दार्विक, चन्द्रभागा और कश्मीर के आसपास के क्षेत्रों पर शासन किया।

III. ग्रंथीय उद्धरण सूची (संदर्भ)

  1. विष्णु पुराण: पुस्तक 4, अध्याय 1 से 24 (विशेषकर अध्याय 23 एवं 24 के श्लोक)।

  2. Fixing the Date of Mahabharata: डॉ. ई. वेदव्यास (अध्याय 6, 7 एवं पृष्ठ 163)।

  3. Agnivamsa Kings & Kali Saka Vignanam: श्री कोटा वेंकटाचलम् (पृष्ठ 20, अध्याय 1)।

  4. History of Indian Mathematics: शंकर बालकृष्ण दीक्षित (अनुवाद: डॉ. रेमेला अवधनुलु, पृ. 648)।

  5. श्रीमद्भागवतम्: स्कन्ध 12, अध्याय 2, श्लोक 33।

  6. महाभारत कालनिर्णयम्: डॉ. ई. वेदव्यास (पृ. 134)।

  7. ज्योतिर्विदाभरणम्: कालिदास को समर्पित (अध्याय 20 एवं 22; श्लोक 22:9–10, 22:22)।

  8. The Lost City of Dvarka: डॉ. एस.आर. राव।

  9. विश्वगुणादर्श चम्पू: वेंकटाध्वरी (श्लोक 752–762)।

  10. स्कन्द पुराण: वैष्णव खण्ड, अध्याय 10।

  11. रघुवंशम्: कालिदास (सर्ग 9 से 16)।

  12. रोमिला थापर एवं डी.डी. कोसांबी के ऐतिहासिक अध्ययन: प्राचीन भारतीय सभ्यता का आलोचनात्मक तुलनात्मक विश्लेषण।

  13. Rasayana Vajikarana Tantramulu: डॉ. मल्लमपल्ली भैरवमूर्ति (पृ. 43)।

  14. राजतरंगिणी: कल्हण (तरंग 1, 2 और 3)।

  15. संस्कृत वाङ्मय चरित्र: मल्लादि सूर्यनारायण शास्त्री (खंड 1, पृ. 48)।

  16. पुराण तत्त्वदर्शनम्: एम. माधव शास्त्री (पृ. 76)।

  17. अथर्ववेद: काण्ड 3, अध्याय 3, सूक्त 12।

  18. महाभारत: अनुशासन पर्व, अध्याय 12, श्लोक 5।

IV. प्रमुख संदर्भ ग्रंथसूची

  1. श्री विष्णु पुराणम् (पुस्तक 4) — वेदव्यास, गीता प्रेस, गोरखपुर (चतुर्थ संस्करण, पृ. 279–358)।

  2. Fixing the Date of Mahabharata — डॉ. ई. वेदव्यास, श्री वेदव्यास भारती पब्लिकेशन्स, हैदराबाद (1990)।

  3. Jyotirvidabharanam of Mahakavi Kalidasa — संपादक: तेलकपल्ली विश्वनाथ शर्मा, हैदराबाद (2010)।

  4. Kali Saka Vignanam & Agnivamsapu Raajulu — श्री कोटा वेंकटाचलम्, विजयवाड़ा (1949/1950)।

  5. Rajarangini of Kalhana — गवर्नमेंट सेंट्रल बुक डिपो, मुंबई (1892)।

  6. History of Bharat Across Generations — रोमिला थापर, हैदराबाद बुक ट्रस्ट (1984)।

  7. The Culture and Civilisation of Ancient India in Historical Outline — डी.डी. कोसांबी, तेलुगु अकादमी, हैदराबाद (1998)।

  8. The Lost City of Dvarka — शिकारिपुरा रंगनाथ राव (एस.आर. राव), आदित्य प्रकाशन, नई दिल्ली (1999)।

  9. History of Indian Mathematics — शंकर बालकृष्ण दीक्षित (अनुवाद: डॉ. रेमेला अवधनुलु, श्री वेदभारती, खंड 1, 2015)।

  10. श्रीमद्भागवत महापुराण — गीता प्रेस, गोरखपुर।

  11. विश्वगुणादर्श चम्पू — वेंकटाध्वरी, आर. वेंकटेश्वर एंड कंपनी, मद्रास (1945)।

  12. स्कन्द पुराणम् (वैष्णव खण्डम्) — खेमराज श्रीकृष्णदास / वेंकटेश्वर प्रेस, मुंबई (1831)।

  13. Purana Dig-Darshan / Purana Tatwadarsanamu — एम. माधव शास्त्री, जियर इंटीग्रेटेड वैदिक अकादमी (JIVA), मुचिन्तल (2018)।

  14. वाल्मीकि रामायण एवं महाभारत — गीता प्रेस, गोरखपुर।