

डॉ. वी. ए. कुमारस्वामी (ए.के.एस. वेदान्तम्)
सेवानिवृत्त प्राचार्य, केंद्रीय विद्यालय (सी.आर.पी.एफ.), हैदराबाद – 500 005
फोन: 040-65353584 / 8019693260
मूल निवास का पता:
कुंचवरम, गुंटूर जिला – 522 306, आंध्र प्रदेश
फोन: 9963923769
वर्तमान निवास का पता:
3-122/4, प्लॉट-37, आर-3, अशोक नगर कॉलोनी रोड,
उप्पल डिपो के सामने, हैदराबाद – 500 092
मेरे सम्मानित मित्र डॉ. चि. शिवराम कृष्ण शर्मा एक वेदविद्वान हैं और विद्यारण्य वेद भाष्य के प्रामाणिक परीक्षकों में से एक हैं। प्राचीन भारतीय इतिहास का गहन ज्ञान रखने वाले ऐसे पारंपरिक विद्वान से परिचित होना अत्यंत दुर्लभ अवसर है। वेदों, इतिहासों और पुराणों में उपलब्ध प्रचुर प्रमाणों के आधार पर उन्होंने हड़प्पा अवशेषों के ऐतिहासिक तथ्यों का गहन अध्ययन करते हुए एक नवीन दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।
उन्होंने विद्यालयों और महाविद्यालयों में पढ़ाए जाने वाले वर्तमान इतिहास को चुनौती दी है, जिसे बहुत पहले विदेशी विद्वानों ने पूर्वाग्रहपूर्ण दृष्टिकोण से निर्मित किया था। उनका उद्देश्य भारतीयों के मन में अपनी ही संस्कृति और इतिहास के प्रति संदेह उत्पन्न करना था, जिससे वे भारत पर अपनी औपनिवेशिक सत्ता को लंबे समय तक बनाए रख सकें।
इस कृति में डॉ. शर्मा का प्रयास अत्यंत प्रशंसनीय है, क्योंकि उन्होंने इस महान राष्ट्र के दीर्घकालीन और प्राचीन इतिहास को स्थापित करने का सफल प्रयास किया है। उन्होंने अर्धमात्रा (अर्ध-प्रणव) की भी शिव पुराण के आधार पर सार्थक व्याख्या प्रस्तुत की है तथा यह स्थापित किया है कि प्रणव (ॐकार) का उद्गम महेश्वर (भगवान शिव) से हुआ है।
यह खोज कि हड़प्पा के अवशेषों का आंध्र प्रदेश के कोनसीमा क्षेत्र स्थित व्याघ्रेश्वरम ग्राम से स्वाभाविक संबंध है, जहाँ एक प्राचीन शिव मंदिर भी स्थित है, हमें अत्यंत आनंद प्रदान करती है।
मेरे विचार में प्राचीन भारत के वास्तविक इतिहास का अध्ययन करने का मुख्य उद्देश्य आत्मबोध प्राप्त करना है, जो आत्मविश्वास को बढ़ाता है। जब भारतवासी अपना आत्मविश्वास पुनः प्राप्त कर लेंगे, तब हमारे युवाओं को अपनी आजीविका के लिए विदेश जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी और न ही अपने ही देश में बेहतर अवसर प्राप्त करने के लिए विदेशी डिग्रियों से मान्यता पाने की आवश्यकता होगी।
डॉ. चि. एस.आर.के. शर्मा द्वारा किए गए इस महान परिश्रम को देखकर अत्यंत प्रसन्नता होती है। मैं उन्हें हार्दिक बधाई देता हूँ। मेरी हार्दिक कामना है कि भारत सरकार इस शोध कृति को मान्यता प्रदान करे, जिससे इस महान राष्ट्र के प्राचीन इतिहास को सही स्वरूप में स्थापित किया जा सके।
— डॉ. वी. ए. कुमारस्वामी
श्रीस्तोत्रम् (संस्कृत चम्पू)
स्वामीसच्चिदानन्दः (लघुकाव्यम्)
आत्मदर्शनम् (संस्कृत में शोधप्रबंध)
सरल संस्कृत का तुलनात्मक व्याकरण
वंशकर्ता ययातिः (संस्कृत नाटिका)
हनूमत्संभवम् (संस्कृत काव्यम्)
सदाचारसंग्रहः (अंग्रेज़ी में रूपांतरण)
शिवमहिम्नः स्तवस्तोत्रम् (तेलुगु एवं संस्कृत पद्यों में अनुवाद)
अंतरात्मा की पुकार (तेलुगु, अंग्रेज़ी और हिंदी)
भारतीय संस्कृति एवं हिंदू धर्म की प्रमुख विशेषताएँ
भृगुसंदेशम् (तेलुगु गीतिकाव्य)
श्रीलक्ष्मी कृपालक्ष्मी (1000 तेलुगु पद्य)
भजनयोगम् (तेलुगु व्याख्या)
मट्टपल्ली लक्ष्मीनरसिंह नक्षत्रमाला
विष्णुसहस्रनाम लक्ष्म्यष्टोत्तर शतनाम पद्य
भगवद्गीता बहुविध प्रश्नमाला (व्याख्यात्मक)
ययाति महीभर्त (तेलुगु पौराणिक कृति)
मद्दि हनुमत्स्तोत्रम्
(कुल मिलाकर 36 से अधिक रचनाएँ प्रकाशित हैं)