द्वारका के प्रमाण

(19) द्वारका में किए गए उत्खनन के दौरान भगवान विष्णु की पत्थर की मूर्ति, मिश्रित धातु की एक घंटी जिसे घड़ी की तरह बजाया जाता था, किले की परकोटा-दीवारों की संरचना, बलुआ पत्थर से निर्मित दीवारें, राजमहल, जहाज निर्माण स्थल, बड़े पत्थर के लंगर, स्तंभ, पर्वत की चोटी आदि अवशेष प्रकाश में आए।

बेट द्वारका के निकट ऐसे मिट्टी के पात्र प्राप्त हुए हैं जिन पर वैदिक संस्कृत लिपि में अभिलेख अंकित हैं। इनके तथा खगोलीय गणनाओं के आधार पर अनेक शोधकर्ताओं ने महाभारत के काल का निर्धारण किया है। हमारी मातृभूमि के वास्तविक इतिहास को जानने के लिए बड़ी संख्या में अभिलेख, वैज्ञानिकों के मत, महान कवियों के कथन, समुद्र के भीतर प्राप्त प्रमाण, खगोलीय तथ्य, प्राचीन राजवंशों का विवरण, शासकों के नाम तथा उनके शासनकाल से संबंधित जानकारी उपलब्ध है। इतने प्रमाण उपलब्ध होने के बावजूद आज भी विद्यालयों और महाविद्यालयों की इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में विदेशियों द्वारा प्रस्तुत पुराने और विकृत विषयों को ही पढ़ाया जा रहा है।